शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

ये तो हरामखोरी की हद है

आज यानी शुक्रवार को टीवी पर एक खबर देखी। खबर तमिलनाडु की थी, जहां एक पुलिसवाले को कुछ गुंडों ने अधमरा कर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था। अगले कुछ मिनटों में वहां से तमिलनाडु के दो मंत्रियों का काफिला निकला पर किसी ने भी उसे उठाकर अस्‍पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई। इसे हरामखोरी की हद नहीं तो क्‍या कहेंगे। बल्कि मेरे मन में तो उन मंत्रियों के लिए गालियां उबल रही हैं।

ये वो नेता हैं जो भाषण देते वक्‍त तो खुद को जनता का सेवक बताने से नहीं चूकते हैं पर जब वाकई जनसेवा की बात आती है तो इनका रुतबा आड़े आता है। इस दर्दनाक वाकये के बाद तो मुझे लगता है कि यदि ये दोनों मंत्री किसी सभा में जाएं तो टीवी सीरियल लापतागंज के एक एपिसोड की ही तरह इनका स्‍वागत विशेष किस्‍म के हार और अल्‍फाजों से किया जाना चाहिए।

उस शहीद सब इंस्‍पेक्‍टर को लाख-लाख नमन और हरामखोरों को लानत के साथ मैं लिखना बंद करुंगा। ऐसे लोगों पर शब्‍द और समय दोनों ही बर्बाद करना नहीं चाहता हूं।

6 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा सर,इनकी जितनी लानत मलामत की जाए कम हैं.संवेदनहीनता की इन लोगो ने पराकाष्ठा पर कर दी .अब ये किस मुह से अपने आप को जनता का हितैषी कहेंगे. इसमें मजेदार बात यह रही की घायल इन्स्पेक्टर के महकमे के लोगो ने भी इन्स्पेक्टर की मदद करने की कोई कोशिश नहीं की.
    दुखद,अत्यंत दुखद.

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  2. bolne ke liye shabad nahi hain aise harmkhoro ke liye. inke liye haramkhor shabad ka istemaal karna is shabad ki tauheen hogi. lekin yahan aapattijanak shabado ka prayog nahi kiya ja sakta isliye haramkhor shabad se hi kaam chakla raha hoon. jab maine is khabar ko dekha to mere dimag mein ek hi baat aayi ki mantri aur neta to aisa kar sakte hain lekin unki suraksha mein lage police ke jawano ko kya hua tha? yeh ek bada prashan hai?????????

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  3. देश के सच्चे सेवको को नमन और इन हराम खोरो को @$%^&*(&&%$^%$*%$#

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  4. देश के सच्चे सेवको को नमन और इन हराम खोरो को @$%^&*(&&%$^%$*%$#

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  5. तुम उम्मीद किसी से कर बैठे

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