Saturday 12 September 2009

दिनेश दीनू ने पीपुल्स इंदौर को कहा बाय

कुछ ही महीने पहले पीपुल्स समाचार समूह ने अपने इंदौर संस्करण के लिए आईनेक्स्ट से आए दिनेश दीनू को नियुक्त किया था। दिनेश जी ने वहां शुरुआती नियुक्तियां भी की। लेकिन दो दिन पहले प्रबंधन ने उन्हें भोपाल आने के लिए कह दिया। दीनू जी ने भोपाल आने के बदले इस्तीफा दे दिया।

सूत्रों की मानें तो तीन संपादकों और काम के बंटवारे को लेकर ऐसी परिस्थितियां बनीं कि उनका जाना तय माना जा रहा था। दैनिक भास्कर जबलपुर के संपादक रह चुके विकास मिश्रा जी जो अब तक ज्वाइंट एडिटर थे उन्हें संपादक का पद सौंपा गया है। ऐसी खबरें हैं कि पत्रिका इंदौर व दैनिक भास्कर इंदौर के कुछ रिपोर्टर भी पीपुल्स का रुख कर सकते हैं।

  • राजस्थान पत्रिका के कोटा संस्करण से ईशान अवस्थी जी ने भी पीपुल्स ज्वाइन कर लिया है। ईशान जी कोटा से पहले पत्रिका समूह के अखबार न्यूज टुडे के इंदौर संस्करण में थे। उनका ट्रांसफर पिछले साल कोटा कर दिया गया था।
  • नवदुनिया भोपाल के बिजनेस रिपोर्टर पंकज भारती ने भी पीपुल्स ज्वाइन कर लिया है। नवदुनिया के पहले पंकज भास्कर डॉट कॉम मुंबई में थे।

Wednesday 29 July 2009

फिर भी कविता लिख लेता हूँ...

सुबह से लेकर रात तक... भागती रहती है जिंदगी ..
कभी इस खबर.. कभी उस खबर...
इनके बीच मै बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ...
बदबूदार राजनीति... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ.. सेलेब्रेटियों के पाखंड..

चौराहे पर एक कट चाय पीकर... फिर भी कविता लिख लेता हूँ...

निर्मोही सा... अब ये मन... नहीं पसीजता किसी घटना से...
मोहल्ले के कुत्ते की मौत पर.... मै कभी बहुत रोया था....
अब नर संहारो से भी कोई सरोकार नहीं ....

फिर भी देर रात घर लौटते वक़्त..
मै मुंडेर पर ..चिडियों का पानी भर देता हूँ...

परिभाषा काल की मुझे नहीं मालूम.. जाने कब क्या हो...
कोई मिला तो हंस लिए... न मिला तो चल दिए...
पदचाप अपने ...निशब्द भी मिले... तो यू ही कुछ गुनगुना लिया...
षडयंत्र, राजनीति, विरोध, प्रदर्शन... जीवन के अब सामान्य पहलू से हो चले...

बचपन...की याद बहुत आती है... खेतो की मिट्टी में गुजरा था बचपन..
अब धमाको में उड़े.. बच्चो का खून...
अपनी खबर देखते-पढ़ते... करवट बदलते रात काट देता हूँ मैं
मैं फिर भी कविता लिख लेता हूँ

प्रिय मित्र अंकित श्रीवास्तव की यह रचना पढ़िए। अंकित दैनिक भास्कर समाचार समूह की भोपाल कॉरपोरेट एडिटोरियल डेस्क पर कार्यरत हैं।

Thursday 23 July 2009

साबित हो गया बिहार में जंगलराज

अब तक सुनते आए हैं कि बिहार देश का पिछड़ा राज्य है, यहां जंगल राज है। अपराधियों और बाहुबलियों का बोलबाला है। पुलिस प्रशासन खत्म हो चुका है। लेकिन आज की घटना के बाद यह साबित हो गया है, वाकई प्रदेश में कानून व्ववस्था का अस्तित्व खत्म हो चुका है। इससे नीच घटना क्या होगी कि किसी प्रदेश की राजधानी में खुलेआम इस तरह की घटना हो और पुलिस का दूर-दूर तक पता ही न हो।

जिन लोगों ने उसे भरी सड़क में उस लड़की के कपड़े उतारे और उसे खुले बदन दौड़ाया, मेरी राय में तो उन सबको गोली मार देना चाहिए।

मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर इसमें किस-किस को दोषी माना जाए। उन कुत्तों की फौज को जिन्होंने उस औरत के शरीर को बेआबरु किया, जो औरत मां, बहन और बीवी होती है। या उन नपुंसकों की फौज को जिसे प्रशासन और पुलिस कहा जाता है। घिन आती है ऐसे लोगों पर।

पूरी घटना जी न्यूज पर देखी जा सकती है।

हुआ यूं कि पटना के एक स्थानीय होटल से एक जोड़े को निकाला गया तो कुछ तालिबानी माइंडसेट वाले संस्कृति के ठेकेदारों ने उन्हें घेर लिया। इन आवारा लोगों के समुदाय ने लड़के को खूब पीटा और लड़की के बदन से सारे कपड़े नोचकर उसे सड़क में दौड़ाया। यही है एक लोकतांत्रिक देश में महिलाऒं की स्थिति का कड़वा सच।

बिहार की राजधानी पटना में आज तालिबान जैसी घटना का एक शर्मनाक नजारा देखने को मिला। शहर के भीड़-भाड़ वाले रास्ते पर एक लड़की के उपर चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसके जिस्म पर मौजूद कपड़े फाड़े गए।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक लड़की अपने ब्वॉय फ्रेंड के साथ घूम रही थी तभी दोनों में किसी बात को लेकर अनबन हुई और लड़की ने लड़के से उसका मोबाइल छीन लिया जिसके बाद लड़के ने लड़की पर चोरी का आरोप लगाकर भीड़ एकत्रित कर लिया जिसके बाद शुरु हो गया तालिबानी हैवानियत। वहां मौजूद कुछ लोगों ने लड़के-लड़की को जिस्मफरोसी के धंधें में लिप्त होने को लेकर दोनों को जमकर पीटा,इसके बाद समाज के ये गुंडे लड़की का सबके सामने बीच सड़क पर चीर हरण करने लगे।

लड़की के शरीर पर मौजूद कपड़ो को ये लोग कुत्तों की तरफ फाड़ दिए। सबसे बड़ी बात यह है कि उस भीड़ में ऐसा कोई भी शख्स नहीं था जो यह बोल सके कि यह गलत हो रहा है। सभी इस घटना को रोमांचक अंदाज में लेकर मजा ले रहे थे। लड़की चीख-पुकार कर रहम की भीख मांग रही थी लेकिन सभी मूक बनकर सिर्फ नजारा देख रहे थे।

इतने शर्मनाक घटना के बाद वहां की पुलिस अपना बचाव करते हुए नचर आई। पुलिस ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। किसी लड़की के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।

घटना के बाद पूरे देश में इसकी कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। इस संबंध में भूतपूर्व रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव का कहना है कि बिहार में इस प्रकार की घटना अपने आपमें बेहद ही शर्मजनक है। उन्होंने मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर प्रहार करते हुए कहा कि इनके शासन में नियम कानून की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं कहीं भी कानून के साथ खिलवाड़ शुरु हो जाता है। यादव ने कहा कि वे पीड़ित लड़की को न्याय दिलाने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।

Monday 13 July 2009

मुकाती जी बने पत्रिका के मैगजीन हेड

श्री पंकज मुकाती को राजस्थान पत्रिका के मैग्जीन डेस्क का प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले वो इंदौर में पत्रिका के स्थानीय संपादक थे।